আমার প্রাইভেট শোসমূহ
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প্রাইভেট শো-এর জন্য সবচেয়ে বেশি রেটিং পাওয়া মডেলদের মধ্যে একজন
আমি প্রাইভেট শোগুলোতে যা করি
অ্যানাল, রান্না, ইরোটিক ড্যান্স, গ্যাগিং, হ্যান্ডজব, হিল, স্প্যাঙ্কিং, টপলেস, ডিলডো বা ভাইব্রেটর, ডার্টি টক, ডগি স্টাইল, ফিঙ্গারিং, হস্তমৈথুন, নিপল টয়, অয়েল শো, ধূমপান, ব্লোজব, কাউগার্ল, ডিপথ্রোট, অর্গাজম, রোল প্লে, সেক্স টয়, স্কোয়ার্ট, টোয়ার্ক, যোগা
ইউজারদের রিভিউ
এখনও কোনো রিভিউ নেই। প্রথম হন — একটি প্রাইভেট শুরু করুন!
मेरे पास युवक आ जाते हैं, वे कहते हैं कि क्या करें, मन में बड़े बुरे विचार उठते हैं।
बुरे विचार? मैं पूछता हूं, कौन से बुरे विचार?
वे कहते हैं, एक स्त्री से प्रेम हो गया है। बड़े बुरे विचार उठते हैं। आप हमें छुड़ाओ।
स्त्री से प्रेम हो गया है, इसको वे बड़े बुरे विचार कह रहे हैं। प्रेम और बुरा विचार! लेकिन यह समझाया गया है, यह सिखाया जा रहा है। पंडित-पुरोहितों की जमातें इस जहर को फैला रही हैं।
यह बिलकुल स्वाभाविक है। इसमें कुछ बुरा नहीं है। इसमें कुछ पाप नहीं है, अपराध नहीं है। हां, यह बात जरूर सच है, इतने पर ही रुक मत जाना। कीचड़ को ही समेट कर बैठ मत जाना। कीचड़ में ही बैठे मत रह जाना। कमल भी जन्माने हैं। कमल की याद रहे, कमल की तलाश रहे। मगर कीचड़ में ही पड़े हैं कमल। करो प्रेम! निर्भय होकर प्रेम करो! प्रेम करो जागरूक होकर। सब अपराध-भाव छोड़ कर प्रेम करो।
पुरुष का प्रेम समुंदर सा होता है। गहरा, अथाह पर वेगपूर्ण लहर के समान उतावला। हर बार तट तक आता है, स्त्री को खींचने, स्त्री शांत है मंथन करती है, पहले ख़ुद को बचाती है इस प्रेम के वेग से, झट से साथ मे नहीं बहती। पर जब देखती है लहर को उसी वेग से बार बार आते तो समर्पित हो जाती है समुंदर में गहराई तक, डूबने का भी ख़्याल नहीं। पर स्त्री मचल उठती है इतना प्रेम देख प्रतिदान के लिए, वो उड़कर बादल बन जाती है, अपना प्रेम दिखाने को तत्पर हो वो बरसने लगती है, पहले हल्की हल्की, समुंदर को अच्छा लगता है वो भी बहने लगता है, कभी कभी वेग से उछलता है प्रेम पाकर, फिर शांत हो जाता है। पर स्त्री बरसती रहती है लगातार झूमकर दो दिन, तीन दिन, बहुत दिन तक। मगर अब पुरुष से इतना प्रेम समेटना मुश्किल होने लगता है। उसे सब देखना है, आते जाते जहाज, तट पर लोग। मगर स्त्री प्रेम के उन्माद में बरस रही है, समुंदर से संभलता नहीं तो वो रुकने कहता, किसी और देश जाने कहता। पर प्रेम में समर्पित स्त्री को रोकना असंभव है, जब देखती है कि समंदर अब नहीं चाहता तो वो दर्द के आवेग में बरसती है पास बुलाने को, स्त्री के आँसू ख़तरनाक होते हैं
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सुंदर महिला नग्न अवस्था में खड़ी है
तो आप कितनी देर उसे देखोगे.. थोड़ी देर में आपका मन यहां वहां भागने लगेगा। कपड़ों में ढकी महिला में एक आकर्षण होता है नग्न महिला उतनी आकर्षक नहीं लगती जितनी वह कपड़ों में लगती है। नग्नता आकर्षक नहीं बल्कि जो ढका है वही सच्चा सौंदर्य है क्योंकि वही कल्पना को उड़ान देता है।नग्नता ज्यादा ताकतवर होती है परंतु तहजीब से लिपटी हुई खूबसूरती की बात ही कुछ और है। जो पूरी तरह दिख जाए उसमें रहस्य नहीं बचता और जिसमें रहस्य ना हो उसमें आकर्षण कब तक टिकेगा.. खूबसूरती की सबसे बड़ी ताकत होती है ढका होना ताकि नजर से पहले कल्पना चलने लगे..!!
Touch my ass in picture and see magic ✨
Love is a consequence of the realization of truth. Love is a shadow. Only a true person can be aloving person. A false person cannot be loving. He can only pretend, he can only put up a front. That is the meaning of the word ”pretend”: he can only play a role, he can wear a mask, he can smile.He can go through the empty gestures, the motions of love, but there is no love possible because he himself is a lie, and whatsoever he is doing is Iying. Even in his very very intimate moments he
remains a pretender because he has not yet recognized himself as something beyond the mind.Once you know who you are, not as taught by others but directly, immediately, the truth is achieved
and love follows like a shadow....
But love can come only when truth has arrived. There is no other way for love to Come. Love is a byproduct. One cannot be loving unless one is true. So whenever you are true, you are loving – ofnecessity. The man of truth is full of love.
Enjoy with me
सदा आनंदित और शांत रहने का सूत्र .....
अनुकरण मत करो, दूसरों को भूलो और खुद में रमो।
एक ही राज है इस जगत में शांति से जीने का
और अपनी नियति पूरी कर लेने का , उस अर्थ को उपलब्ध हो जाने का जिसके लिए परमात्मा ने तुम्हें जन्म दिया , वह काव्य तुमसे फूट जाए , वह गीत तुम गा लो , वह नृत्य तुमसे पूरा हो सके , एक ही रास्ता है ।
और....
वह तीसरा खजाना है कि तुम महत्वाकांक्षा छोड़ दो , तुम प्रतिस्पर्धा छोड़ दो ।
तुम अपना जीवन जीओ । तुम दूसरे के जीवन का अनुकरण क्यों करते हो ?
दूसरे को जाने दो जहां जाता हो । वह उसकी मौज है । उसका रास्ता होगा । तुम उसके पीछे क्यों हो जाते हो ? तुम स्वयं में रमो ।
🔯 अगर यह सेक्स है, तो कोई चिंता की बात नहीं। अच्छा है कि तुम नपुंसक नहीं हो — यह सोचो!
अगर यह सेक्स है, तो अच्छा है — तुम्हारे पास ऊर्जा है। अब तुम उस ऊर्जा का उपयोग कर सकते हो।
क्या तुमने कभी सुना है कि कोई नपुंसक आदमी ज्ञान को प्राप्त हुआ हो? मैंने नहीं सुना। और मानो मेरी बात, ऐसा कभी हुआ भी नहीं — हो ही नहीं सकता। नपुंसक आदमी संसार का सबसे निर्धन आदमी है, क्योंकि उसके लिए ज्ञान संभव ही नहीं है। चाहे वह कोशिश भी करे, यह नहीं हो सकता — क्योंकि उसके पास बदलने के लिए ऊर्जा ही नहीं है।
और एक और सच्चाई बता दूँ: जब-जब ज्ञान हुआ है, यह हमेशा बहुत कामुक व्यक्ति को ही हुआ है — हमेशा!
क्योंकि उनके पास अधिक ऊर्जा होती है… और उसी ऊर्जा पर वे सवार हो जाते हैं। यह तथाकथित गुनगुने लोगों को कभी नहीं हुआ — उनके साथ कुछ नहीं होता; वे अपनी गुनगुनाहट में अटके रहते हैं। यह हमेशा “गरम” लोगों को हुआ है।
आगे सफर था और पीछे हमसफर था..
रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता..
मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..
ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता.
मुद्दत का सफर भी था और बरसो
का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते.
यूँ समँझ लो,
प्यास लगी थी गजब की
मगर पानी मे जहर था
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.
बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा काश थोड़ा और वक्त होता।।
My work time
6pm to 10 pm every night
जो लोग शरीर के तल पर ज्यादा संवेदनशील हैं, उनके लिए ऐसी विधियां हैं जो शरीर के माध्यम से ही आत्यंतिक अनुभव पर पहुंचा सकती हैं। जो भाव-प्रवण हैं, भावुक प्रकृति के हैं, वे भक्ति-प्रार्थना के मार्ग पर चल सकते हैं। जो बुद्धि-प्रवण हैं, बुद्धिजीवी हैं, उनके लिए ध्यान, सजगता, साक्षीभाव उपयोगी हो सकते हैं।
लेकिन मेरी ध्यान की विधियां एक प्रकार से अलग हट कर हैं। मैंने ऐसी ध्यान-विधियों की संरचना की है जो तीनों प्रकार के लोगों द्वारा उपयोग में लाई जा सकती हैं। उनमें शरीर का भी पूरा उपयोग है, भाव का भी पूरा उपयोग है और होश का भी पूरा उपयोग है। तीनों का एक साथ उपयोग है और वे अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग ढंग से काम करती हैं।
शरीर, हृदय, मन—मेरी सभी ध्यान विधियां इसी श्रृंखला में काम करती हैं। वे शरीर पर शुरू होती हैं, वे हृदय से गुजरती हैं, वे मन पर पहुंचती हैं और फिर वे मनातीत में अतिक्रमण कर जाती हैं।
Iam diksha, 23 year old, from delhi.
थोड़ी हवस भी लाजमी है इश्क़ में साहब वरना शुध्द इश्क़ करने वाले तो इस दुनिया में नपुंसक समझे जाते हैं।